भारत-पाकिस्तान DGMO बातचीत में संघर्ष रोकने पर सहमति

हुसैन अफसर
हुसैन अफसर

भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष रोकने को लेकर सहमति बन गई है। सोमवार शाम 5 बजे दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल ऑफ़ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के बीच हुई अहम बातचीत में सीमा पर शांति कायम रखने पर चर्चा हुई।

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“दोनों पक्षों ने एक भी गोली न चलाने और आक्रामकता से बचने की प्रतिबद्धता जताई है।” — सेना सूत्र

बातचीत में क्या हुआ?

भारतीय सेना के उच्च सूत्रों के अनुसार:

  • दोनों देशों ने सीमा पर तनाव कम करने की दिशा में मिलकर प्रयास करने पर सहमति दी।

  • अग्रिम मोर्चों से सैनिकों की संख्या घटाने के लिए तत्काल कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है।

  • किसी भी नई आक्रामकता की शुरुआत न करने की स्पष्ट बात दोनों पक्षों ने दोहराई।

DGMO लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई का बयान

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में DGMO राजीव घई ने कहा:

“पाकिस्तान एयरफोर्स की कोई क्षमता नहीं थी जो भारत के बहुस्तरीय रक्षा ढांचे को पार कर भारतीय एयरफील्ड्स या लॉजिस्टिक ठिकानों को नुकसान पहुंचा सके।”

संघर्ष विराम का बैकग्राउंड

  • पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पिछले चार दिनों में सीमा पर भारी गोलाबारी हुई।

  • दोनों देशों के बीच 10 मई को संघर्ष रोकने पर सहमति बनी थी।

  • बातचीत इसी के तहत एक फॉलो-अप प्रयास है ताकि LOC पर तनाव न बढ़े।

ड्रोन अलर्ट: सीमा पर नई चिंता

DGMO वार्ता के कुछ ही घंटों बाद भारतीय सेना ने देर रात यह जानकारी दी कि:

जम्मू-कश्मीर के सांबा सेक्टर में कुछ संदिग्ध ड्रोन देखे गए हैं।”

हालांकि ये ड्रोन किस देश से आए या उनकी मंशा क्या थी, इसकी जांच जारी है।

क्या है इसका रणनीतिक महत्व?

  • लंबे समय बाद भारत-पाक सीमा पर सकारात्मक सैन्य संवाद हुआ है।

  • यह वार्ता दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है।

  • सैन्य स्तर की बातचीत से राजनीतिक और कूटनीतिक वार्ताओं की राह भी खुल सकती है।

शांति की ओर एक क़दम, मगर निगाहें बनी रहेंगी ड्रोन पर

DGMO स्तर पर बातचीत से सीमा पर शांति की संभावना ज़रूर बढ़ी है, लेकिन सांबा ड्रोन जैसी घटनाएं इस कोशिश को कमजोर भी कर सकती हैं। दोनों पक्षों को न केवल बातचीत करनी होगी, बल्कि जमीनी कार्रवाई में ईमानदारी भी दिखानी होगी

शांति का रास्ता संवाद से होकर जाता है — लेकिन निगरानी की रोशनी में।

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